“Not a toy, it’s a disaster”: Carbide guns took away the eyesight of 125 people in Madhya Pradesh on Diwali

खिलौना नहीं, कहर है ये”: दिवाली पर मध्य प्रदेश में कार्बाइड गन ने छीनी 125 आंखों की रोशनी

भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में इस दिवाली एक सस्ती लेकिन जानलेवा ‘देसी बंदूक’ ने कई परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया। महज़ ₹150–₹200 में बिकने वाली यह कार्बाइड गन बच्चों के लिए खेल नहीं, बल्कि आंखों की रोशनी छीनने वाला खतरा बन गई।

दिवाली की चमक में छिपा अंधेरा

हर साल दिवाली पर पटाखों का क्रेज बढ़ता है। लेकिन इस बार मध्य प्रदेश में एक नया ‘खिलौना’ वायरल हुआ — कार्बाइड गन, जिसे बच्चे बड़े उत्साह से खरीद रहे थे। यह गन प्लास्टिक पाइप और कैल्शियम कार्बाइड से बनी होती है। जब इसमें पानी डाला जाता है, तो एसिटिलीन गैस बनती है और एक चिंगारी से भयंकर विस्फोट होता है।

इस विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक होती है कि आंखों में गंभीर चोट पहुंचती है। भोपाल के अस्पतालों में 122 से अधिक लोग भर्ती हुए हैं, जिनमें अधिकांश 8 से 14 वर्ष के बच्चे हैं।

डॉक्टरों की चेतावनी: “यह पटाखा नहीं, आंखों का दुश्मन है

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया:

“इस बार जो आंखों में क्षति पहुंची है, वह बेहद भयावह है। धमाके से आंख का गोला बाहर आ रहा है, जलन हो रही है और आंख में धक्का लग रहा है।”

इस बयान ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। कम से कम 14 बच्चों ने अपनी आंखों की रोशनी खो दी है। कई मामलों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, और कुछ को लाइफटाइम दृष्टिहीनता का सामना करना पड़ सकता है।

कैसे काम करती है यह जानलेवा गन?

  • सामग्री: प्लास्टिक पाइप, कैल्शियम कार्बाइड
  • क्रिया: पानी के संपर्क में आते ही एसिटिलीन गैस बनती है
  • परिणाम: गैस विस्फोट करती है, जिससे तेज आवाज और दबाव उत्पन्न होता है
  • खतरा: आंखों, कानों और चेहरे पर गंभीर चोट

यह गन खिलौने की तरह दिखती है, लेकिन इसका प्रभाव हथियार जैसा है। बच्चों को यह आकर्षक लगती है, लेकिन इसके परिणाम घातक हैं।

प्रशासन की लापरवाही: जागे जब हादसे हो चुके थे

सबसे चिंताजनक बात यह रही कि प्रशासन ने कोई रोकथाम नहीं की। जब सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे, तब जाकर कार्रवाई शुरू हुई

  • कोई जागरूकता अभियान नहीं चला
  • बाजार में खुलेआम बिक्री होती रही
  • पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने पहले से कोई चेतावनी नहीं दी

यह लापरवाही व्यवस्था पर गंभीर सवाल  खड़े करती है। क्या त्योहारों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ नागरिकों की है?

मातापिता की भूमिका: बच्चों को समझाना जरूरी

इस हादसे ने यह भी स्पष्ट किया कि माता-पिता को बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। कई मामलों में बच्चे बिना जानकारी के इन गनों को खरीद कर खेलते रहे।

  • बच्चों को पटाखों की सुरक्षा के बारे में बताएं
  • सस्ते और अनजान उत्पादों से दूर रखें
  • स्थानीय प्रशासन से जानकारी लें कि क्या सुरक्षित है

क्या होनी चाहिए आगे की रणनीति?

इस हादसे के बाद कुछ जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है:

  1. कार्बाइड गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
  2. बाजार में निगरानी बढ़ाई जाए
  3. स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया जाए
  4. डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम बनाई जाए जो ऐसे मामलों को तुरंत संभाल सके
  5. मीडिया के माध्यम से प्रचार किया जाए कि यह गन कितनी खतरनाक है

दिवाली का असली संदेश: रोशनी, सुरक्षा और समझदारी

दिवाली का मतलब सिर्फ रोशनी और पटाखे नहीं है। यह समझदारी, सुरक्षा और परिवार की खुशियों  का पर्व है। अगर हम बच्चों को सही दिशा दें, तो त्योहारों की चमक और भी बढ़ सकती है।

इस बार की दिवाली ने हमें सिखाया कि एक छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी बन सकती है। आइए, मिलकर यह संकल्प लें कि अगली दिवाली सुरक्षित, जागरूक और खुशहाल होगी।

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