न्यू ईयर सेलिब्रेशन और डिलीवरी हड़ताल की सच्चाई
हां भाई, न्यू ईयर सेलिब्रेशन शुरू हो चुका है। साल का आखिरी दिन, पार्टी की प्लानिंग, दोस्तों के साथ जश्न और घर पर खाने-पीने की पूरी तैयारी। आज के समय में अगर कुछ भूल भी जाएं तो चिंता नहीं होती, क्योंकि Swiggy, Zomato, Blinkit और Zepto जैसे ऐप्स 10 मिनट में सब कुछ घर पहुंचा देते हैं। दूध, सब्जी, स्नैक्स या पार्टी का सामान—सब कुछ बस एक क्लिक दूर है।
लेकिन इस बार 31 दिसंबर की रात कुछ अलग है। जिन लोगों को हम हर दिन “डिलीवरी बॉय” कहकर भूल जाते हैं, वही गिग वर्कर्स इस न्यू ईयर ईव पर हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर आपकी पार्टी, आपकी सुविधा और आपकी आदतों पर पड़ सकता है।

देव दूत नहीं, आम इंसान हैं डिलीवरी वर्कर्स
अक्सर हमें लगता है कि जो पैकेट 10 मिनट में हाथ में आ जाता है, उसके पीछे कोई जादू है। लेकिन हकीकत यह है कि वह कोई मशीन या देवदूत नहीं, बल्कि हमारी तरह का एक इंसान है। सर्दी, गर्मी, तेज बारिश और ट्रैफिक के बीच वह अपनी जान जोखिम में डालकर समय पर डिलीवरी करता है।
सोशल मीडिया पर सितंबर में वायरल हुई एक पोस्ट ने सबको झकझोर दिया था। एक डिलीवरी वर्कर ने बताया कि उसने 15 घंटे लगातार काम किया, 28 डिलीवरी कीं और कुल कमाई हुई सिर्फ ₹763। इसमें से पेट्रोल का खर्च निकालने के बाद हाथ में क्या बचता है, यह समझना मुश्किल नहीं है।
कमाई कम, दबाव ज्यादा
भारत में गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ज्यादातर डिलीवरी वर्कर्स रोजाना 15–16 घंटे काम करते हैं। इतनी मेहनत के बाद भी उनकी औसत कमाई ₹500 से ₹700 के बीच ही रहती है। ऊपर से “10 मिनट डिलीवरी” का दबाव, जो सीधे उनकी सेफ्टी से खिलवाड़ करता है।
ग्राहक को खुश रखने की इस दौड़ में कई बार ट्रैफिक नियम टूटते हैं, हादसे होते हैं और जिम्मेदारी किसी की नहीं होती।
31 दिसंबर गिग वर्कर्स हड़ताल क्यों?
इन सभी परेशानियों को देखते हुए गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को हड़ताल का फैसला किया है। इस आंदोलन को मुख्य रूप से दो संगठन लीड कर रहे हैं:
- तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU)
- इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT)
इन संगठनों का दावा है कि देशभर में 1 लाख से ज्यादा डिलीवरी वर्कर्स या तो ऐप से लॉग आउट करेंगे या काम में कटौती करेंगे। इसका मतलब साफ है—न्यू ईयर ईव पर फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
क्रिसमस पर दिखा था ट्रेलर
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हड़ताल का पहला चरण 25 दिसंबर को शुरू हुआ था। क्रिसमस के दिन 400 से ज्यादा गिग वर्कर्स ने काम बंद कर दिया था, जिससे 50–60% ऑर्डर्स डिले हुए। यूनियन नेताओं का कहना है कि जो कुछ 25 दिसंबर को हुआ, वह सिर्फ ट्रेलर था। असली तस्वीर 31 दिसंबर को देखने को मिलेगी।
गिग वर्कर्स की पांच बड़ी मांगें
टीजीपीडब्ल्यूयू के अध्यक्ष शेख सलाउद्दीन ने साफ शब्दों में प्लेटफॉर्म कंपनियों के सामने पांच मांगें रखी हैं:
- पुराना और फिक्स पेआउट सिस्टम लागू किया जाए
त्योहारों के समय नहीं, बल्कि नियमित रूप से सम्मानजनक भुगतान मिले। - 10 मिनट डिलीवरी सिस्टम खत्म किया जाए
यह सिस्टम वर्कर्स की जान के लिए खतरा है। - आईडी ब्लॉक करने में पारदर्शिता हो
बिना कारण और बिना सुनवाई के आईडी ब्लॉक करना बंद किया जाए। - एल्गोरिदम कंट्रोल में सुधार
इंसेंटिव, ऑर्डर और कमाई पूरी तरह एल्गोरिदम पर निर्भर है, जिसमें पारदर्शिता नहीं है। - ग्रेवेंस मैकेनिज्म और सोशल सिक्योरिटी
शिकायत सुनने की व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा दी जाए।
सलाउद्दीन का कहना है कि यूनियन कंपनियों से बातचीत के लिए तैयार है, बस उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जाए।
गिग इकॉनमी का भविष्य और चिंता
नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, 2029–30 तक भारत की गिग इकॉनमी में करीब 2 करोड़ 35 लाख वर्कर्स शामिल होंगे। अगर आज उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।
कम वेतन, नौकरी की अनिश्चितता और तेज डिलीवरी का दबाव—ये तीनों मिलकर गिग वर्कर्स की जिंदगी को बेहद मुश्किल बना रहे हैं। ऐसे में 31 दिसंबर गिग वर्कर्स हड़ताल सिर्फ एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ आवाज है।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर आप न्यू ईयर पार्टी के लिए आखिरी समय में ऑर्डर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। संभव है कि:
- डिलीवरी में भारी देरी हो
- कुछ ऐप्स पर स्लॉट ही न मिले
- किराना और फूड डिलीवरी सीमित हो जाए
इसलिए बेहतर है कि पहले से तैयारी कर लें और डिलीवरी वर्कर्स की स्थिति को भी समझें।
समर्थन जरूरी क्यों है?
हम सभी रोज इन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। हमारी सुविधा उनकी मेहनत पर टिकी है। अगर आज हम उनके हक की बात नहीं करेंगे, तो कल यही समस्या और बड़ी हो जाएगी।
31 दिसंबर को अगर आपकी डिलीवरी लेट होती है या नहीं आती, तो गुस्सा करने से पहले यह याद रखिए कि कोई इंसान अपने हक और सम्मान के लिए खड़ा है।
निष्कर्ष
न्यू ईयर का जश्न जरूरी है, लेकिन इंसानियत उससे भी ज्यादा जरूरी है। 31 दिसंबर गिग वर्कर्स हड़ताल हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस सुविधा को हम अपना अधिकार समझ बैठे हैं, उसके पीछे कितनी मेहनत और तकलीफ छिपी है।
इस न्यू ईयर, अगर हम थोड़ी तैयारी पहले से कर लें और गिग वर्कर्स के संघर्ष को समझें, तो शायद यह जश्न ज्यादा मायने रखेगा।
आप इस हड़ताल और गिग वर्कर्स की मांगों पर क्या सोचते हैं? अपनी राय जरूर साझा करें।


